SSC CGL, CHSL, CPO और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए संख्या पद्धति के पूरे नोट्स — हर अवधारणा, फॉर्मूला, शॉर्टकट, हल किया हुआ उदाहरण और वे जाल जिनमें नंबर कटते हैं। चारों स्तरों के 40 चैप्टर टेस्ट में जो भी concept आता है, वह सब यहाँ शून्य से समझाया गया है।
संख्या पद्धति (Number System) SSC की मात्रात्मक अभियोग्यता का सबसे अधिक अंक दिलाने वाला अध्याय है। इससे प्रश्न SSC CGL, SSC CHSL, SSC CPO, SSC MTS और लगभग हर प्रतियोगी परीक्षा में आते हैं, और नियम साफ़ हो तो अधिकांश प्रश्न एक मिनट से कम में हल हो जाते हैं।
ये नोट्स हर अवधारणा शुरुआत से समझाते हैं — पहले से कोई तैयारी मान कर नहीं चला गया है। हर नियम के साथ एक हल किया हुआ उदाहरण, परीक्षा वाला शॉर्टकट, और वह गलती दी गई है जिससे सबसे अधिक नंबर कटते हैं।
नोट्स विधि ठीक करते हैं; गति केवल अभ्यास से आती है। इन्हें एक tab में खुला रखिए और दूसरे में टेस्ट — पहले इसी अध्याय के टेस्ट दीजिए, और नियम अपने आप आने लगें तो पूरे पेपर की ओर बढ़िए।
तीन स्तरों में बँटे टेस्ट, इन्हीं नोट्स से जुड़े हुए। हर प्रश्न के साथ चरण-दर-चरण हल।
अभ्यास शुरू कीजिए पिछले वर्षशिफ्ट-वार असली CGL पेपर, उत्तर कुंजी और पूरे हल के साथ। सचमुच क्या पूछा जाता है, यह जानने का सबसे अच्छा तरीका।
PYQ हल कीजिए पिछले वर्षशिफ्ट-वार CHSL पेपर, पूरे हल के साथ। CHSL, CPO और MTS — तीनों के अभ्यर्थियों के लिए उपयोगी।
PYQ हल कीजिए पूर्ण पेपरअसली परीक्षा के समय पर पूरे पेपर, करेंट अफेयर्स सहित और हर प्रयास के बाद विस्तृत हल।
मॉक टेस्ट दीजिएइन नोट्स का उपयोग कैसे करें: एक खंड पढ़िए, उदाहरण को हाथ से ढक लीजिए, स्वयं हल कीजिए, फिर मिलाइए। जो concept केवल पढ़ा गया है वह शाम तक भूल जाता है। जो एक बार इस्तेमाल किया गया है वह टिक जाता है।
परीक्षा में आने वाली हर संख्या किसी न किसी परिवार की सदस्य होती है। परिवार पता हो तो यह भी पता होता है कि क्या हो सकता है और क्या नहीं।
परिवार वृक्ष — सबसे छोटे घेरे से शुरू
हर परिवार अगले के भीतर बैठता है: N ⊂ W ⊂ Z ⊂ Q ⊂ R।
इनमें अपरिमेय कौन है: √16, √20, 0.75, 2/7 ?
√16 = 4, एक पूर्ण संख्या — परिमेय। 0.75 समाप्त हो जाता है — परिमेय। 2/7 = 0.285714285714… दोहराता है — परिमेय। √20 पूर्ण वर्ग नहीं है, इसलिए उसका मूल न समाप्त होता है न दोहराता है — अपरिमेय।
याद रखने योग्य नियम: किसी पूर्ण संख्या का वर्गमूल परिमेय तभी होता है जब वह संख्या पूर्ण वर्ग हो।
निम्नतम रूप वाली भिन्न p/q का दशमलव तभी समाप्त होता है जब q केवल 2 और 5 से बना हो।
दोनों ही परिमेय हैं। समाप्त होने वाला और दोहराने वाला, दोनों चलते हैं; केवल "न समाप्त हो और न दोहराए" वाला अपरिमेय है।
दोहराने वाले दशमलव को भिन्न बनाना, बिना बीजगणित के
शून्य पूर्ण संख्या और पूर्णांक है, पर प्राकृत संख्या नहीं, और वह सम है। साथ ही 0 परिमेय है (0 = 0/1)। "सबसे छोटी प्राकृत संख्या" का उत्तर 1 है; "सबसे छोटी पूर्ण संख्या" का 0।
जातीय मान = स्वयं वही अंक, चाहे वह कहीं भी हो।
स्थानीय मान = अंक × उसकी जगह का मान — यानी संख्या के भीतर उसका वास्तविक मूल्य।
617853 में इकाई से बाईं ओर चलते हुए: 3 (इकाई, 1), 5 (दहाई, 10), 8 (सैकड़ा, 100), 7 (हज़ार, 1000), 1 (दस हज़ार, 10000), 6 (लाख, 100000)।
अतः 1 का जातीय मान 1 है, पर स्थानीय मान 10000।
617853 में 1 और 8 के स्थानीय मानों का योग क्या है?
1 दस हज़ार के स्थान पर → 1 × 10000 = 10000.
8 सैकड़े के स्थान पर → 8 × 100 = 800.
योग = 10800. (यदि उत्तर 9 आया, तो आपने जातीय मान जोड़ दिए।)
बिंदु से दाईं ओर चलते हुए स्थान होते हैं दशमांश (0.1), शतांश (0.01), सहस्रांश (0.001) — हर अगला पिछले का दसवाँ हिस्सा।
12.345 में: 3 दशमांश (0.3), 4 शतांश (0.04), 5 सहस्रांश (0.005)।
सम-विषम का गणित — कई उत्तर एक सेकंड में तय कर देता है
इसे छननी की तरह इस्तेमाल कीजिए: यदि उत्तर विषम होना चाहिए, तो गणना से पहले हर सम विकल्प काट दीजिए।
N को जाँचने के लिए केवल primes से भाग दीजिए, और जैसे ही prime √N से आगे निकले, रुक जाइए।
वहीं क्यों रुकें? यदि N = a × b हो और दोनों √N से बड़े हों, तो a×b, N से बड़ा हो जाएगा। अतः एक गुणनखंड √N तक ज़रूर होगा।
व्यावहारिक पट्टियाँ: 121 से नीचे 2, 3, 5, 7 | 169 से नीचे 11 भी | 289 से नीचे 13 भी।
क्या 197 prime है? √197 ≈ 14, अतः 13 तक जाँचिए।
विषम (2 नहीं) · अंक-योग 17, 3 का गुणज नहीं · अंत 0 या 5 से नहीं · 197 ÷ 7 ≈ 28.1 · 197 ÷ 11 ≈ 17.9 · 197 ÷ 13 ≈ 15.2।
कोई विभाजित नहीं करता → 197 prime है।
ये संख्याएँ prime लगती हैं, पर हैं नहीं। इन्हें देखते ही पहचानना सीखिए:
91 = 7×13 · 119 = 7×17 · 121 = 11² · 133 = 7×19 · 143 = 11×13 · 169 = 13² · 187 = 11×17 · 209 = 11×19 · 221 = 13×17 · 247 = 13×19
पैटर्न देखिए: ये सब दो मँझोले primes के गुणनफल हैं, इसलिए कोई छोटा गुणनखंड इन्हें पकड़ता नहीं। इन्हें 11 और 13 वाली कसौटियाँ ही पकड़ती हैं।
| दायरा | Primes | गिनती |
|---|---|---|
| 1–10 | 2, 3, 5, 7 | 4 |
| 11–20 | 11, 13, 17, 19 | 4 |
| 21–40 | 23, 29, 31, 37 | 4 |
| 41–60 | 41, 43, 47, 53, 59 | 5 |
| 61–80 | 61, 67, 71, 73, 79 | 5 |
| 81–100 | 83, 89, 97 | 3 |
याद रखने योग्य गिनती: 100 से नीचे 25 primes, 100 और 200 के बीच 21 और (यानी 200 से नीचे कुल 46)।
↑ ऊपर जाएँपूरे पेपर में सबसे अधिक समय ये ही बचाते हैं। इन्हें तब तक दोहराइए जब तक ये अपने आप न आने लगें।
| भाजक | कसौटी | उदाहरण |
|---|---|---|
| 2 | अंतिम अंक 0, 2, 4, 6 या 8 | 4738 ✔ |
| 3 | अंकों का योग 3 से विभाज्य | 4152 → 4+1+5+2 = 12 ✔ |
| 4 | अंतिम दो अंक 4 के गुणज | 7316 → 16 ✔ |
| 5 | अंत 0 या 5 से | 2350 ✔ |
| 6 | 2 की कसौटी और 3 की कसौटी, दोनों पास | 516: सम, अंक-योग 12 ✔ |
| 7 | अंतिम अंक का दोगुना बाकी संख्या में से घटाइए; दोहराइए | 343 → 34 − 6 = 28 ✔ |
| 8 | अंतिम तीन अंक 8 के गुणज | 17512 → 512 ✔ |
| 9 | अंकों का योग 9 से विभाज्य | 5346 → 18 ✔ |
| 10 | अंत 0 से | 8970 ✔ |
| 11 | दाईं ओर से एकांतर योग (+ − + −) 0 या 11 का गुणज | 209 → 9 − 0 + 2 = 11 ✔ |
| 12 | 3 की कसौटी और 4 की कसौटी | 936 ✔ |
| 25 | अंतिम दो अंक 00, 25, 50 या 75 | 3675 ✔ |
| 125 | अंतिम तीन अंक 125 के गुणज | 4250 ✔ |
किसी भी composite भाजक के लिए अपना नियम बनाइए
भाजक को co-prime हिस्सों में तोड़िए और हर हिस्सा जाँचिए। 72 = 8 × 9, अतः 8 और 9 जाँचिए। 36 = 4 × 9। 45 = 5 × 9।
ऐसे हिस्सों में मत तोड़िए जिनमें साझा गुणनखंड हो: 24 को "4 और 6" मानना गलत है, क्योंकि 4 और 6 दोनों में 2 है और कसौटी ऐसी संख्याएँ पास कर देगी जो 24 से विभाज्य नहीं। 8 और 3 लीजिए।
क्या 936, 8, 12 और 18 से विभाज्य है?
8: अंतिम तीन अंक 936, और 936 ÷ 8 = 117 ✔
12 = 3 × 4: अंक-योग 18 ✔, अंतिम दो अंक 36 ✔
18 = 2 × 9: सम ✔, अंक-योग 18 ✔
अतः 936 तीनों पास करता है। ("8, 12 और 18 से विभाज्य तीन अंकों की सबसे बड़ी संख्या" ठीक इसी तरह जाँची जाती है।)
कुछ व्यंजक n के हर मान के लिए किसी निश्चित संख्या से विभाज्य होते हैं। दो तथ्य लगभग पूरा काम कर देते हैं:
अतः व्यंजक के भीतर छिपा क्रमागत समूह पहचानिए:
n⁴ − n² सदा 12 से विभाज्य क्यों है?
गुणनखंड: n²(n−1)(n+1)।
3 कहाँ से: n−1, n, n+1 में से एक 3 का गुणज होगा ही।
4 कहाँ से: n सम हो तो n² में 4 पहले से है। n विषम हो तो n−1 और n+1 दो क्रमागत सम संख्याएँ हैं, और उनमें एक 4 की गुणज होती है।
3 और 4 co-prime हैं, अतः 3 × 4 = 12 सदा विभाजित करता है।
"सदैव विभाज्य" वाले प्रश्नों में सबसे छोटी स्थिति पहले जाँचिए। n⁴ − n² में n = 2 पर मान ठीक 12 है — इससे 18 और 24 तुरंत कट जाते हैं। n = 3 (72) या n = 4 (240) जाँचते तो 24 की ओर खिंच जाते।
और यदि दो विकल्प (जैसे 6 और 12) दोनों सदा सही हों, तो प्रश्न सबसे बड़ी ऐसी संख्या पूछ रहा है। शब्द ध्यान से पढ़िए।
पूरे अध्याय का सबसे उपयोगी खंड यही है। लगभग हर पाँचवाँ प्रश्न यहीं से शुरू होता है।
पहला कदम, हमेशा: prime गुणनखंडन। संख्या को primes और उनकी घातों में तोड़िए।
जब तक 2 से भाग जाए, 2 से भाग दीजिए; फिर 3 से, फिर 5 से, फिर 7 से, और आगे।
360 → 180 → 90 → 45 (तीन 2), 45 → 15 → 5 (दो 3), और फिर 5।
अतः 360 = 2³ × 3² × 5।
चार सूत्र। यदि N = pa × qb × rc …
+1 क्यों? क्योंकि किसी गुणनखंड में p की घात 0, 1, 2, … से लेकर a तक हो सकती है — यानी a+1 विकल्प, और वही 0 किसी prime को पूरी तरह छोड़ देने की छूट देता है।
360 के कितने गुणनखंड हैं, और उनका योग क्या है?
360 = 2³ × 3² × 5
गिनती = (3+1)(2+1)(1+1) = 4 × 3 × 2 = 24
योग = (1+2+4+8)(1+3+9)(1+5) = 15 × 13 × 6 = 1170
ध्यान दीजिए, योग में कोष्ठकों को गुणा करना है, जोड़ना नहीं। जोड़ने पर 34 आता है, जो असंभव है — गुणनखंडों का योग तो स्वयं N से बड़ा होना चाहिए।
गुणनखंडों के विशेष परिवार — सब उसी गुणनखंडन से
याद रहे 0 सम भी है और 3 का गुणज भी — इसीलिए 1 सदा पूर्ण वर्ग गुणनखंड भी है और पूर्ण घन गुणनखंड भी।
4500 के कितने गुणनखंड पूर्ण वर्ग हैं?
4500 = 45 × 100 = (3²×5) × (2²×5²) = 2² × 3² × 5³
उपलब्ध सम घातें:
2 के लिए → 0 या 2 → 2 विकल्प
3 के लिए → 0 या 2 → 2 विकल्प
5 के लिए → 0 या 2 (3 विषम है, अतः तीसरा 5 बेकार) → 2 विकल्प
कुल = 2 × 2 × 2 = 8: ये हैं 1, 4, 9, 25, 36, 100, 225, 900।
28 × 34 के कितने गुणनखंड 24 के गुणज हैं पर 48 के नहीं?
हर गुणनखंड 2x3y जैसा है।
24 = 2³×3 का गुणज → x ≥ 3 और y ≥ 1 चाहिए।
48 = 2⁴×3 का गुणज नहीं → y ≥ 1 तो पहले से है, इसलिए बचने का एकमात्र रास्ता x < 4।
दोनों शर्तें एक ही prime पर आ गईं: x ≥ 3 और x < 4 → x ठीक 3। y स्वतंत्र: 1, 2, 3 या 4 → 4 विकल्प।
उत्तर = 1 × 4 = 4 (ये हैं 24, 72, 216, 648)।
याद रखने की बात: जब दो शर्तें एक ही prime को छूती हों, उन्हें पहले एक दायरे में मिलाइए। उन्हें अलग-अलग गिनकर गुणा कभी मत कीजिए।
गुणनखंडों की गिनती से संख्या का रूप पहचानना — "कितनी संख्याओं के ठीक k गुणनखंड हैं" वाले प्रश्नों में काम आता है
विधि: लक्ष्य गिनती को गुणनफल के रूप में लिखिए, हर भाग में से 1 घटाकर घातें पाइए, फिर दिए दायरे में खोजिए।
गुणनखंडों की गिनती विषम हो तो संख्या पूर्ण वर्ग है — क्योंकि गुणनखंड जोड़ियों में आते हैं (d और N/d), और केवल वर्ग में बीच वाला गुणनखंड अपने साथ जोड़ी बनाता है। 36 के 9 गुणनखंड हैं; 105² = 11025 के 27। किसी भी गिनती वाले उत्तर पर यह मुफ़्त जाँच है।
HCF (महत्तम समापवर्तक) = वह सबसे बड़ी संख्या जो दोनों को विभाजित करे।
LCM (लघुत्तम समापवर्त्य) = वह सबसे छोटी संख्या जिसे दोनों विभाजित करें।
prime गुणनखंडन से: HCF में हर साझा prime की सबसे छोटी घात; LCM में हर prime की सबसे बड़ी घात।
24 = 2³×3, 36 = 2²×3² → HCF = 2²×3 = 12, LCM = 2³×3² = 72।
गुणनफल नियम: HCF × LCM = पहली संख्या × दूसरी संख्या।
यह इसलिए चलता है कि हर prime के लिए HCF छोटी घात लेता है और LCM बड़ी — दोनों मिलकर मूल दोनों घातों को ठीक एक-एक बार उपयोग कर लेते हैं।
चेतावनी: यह नियम केवल दो संख्याओं के लिए है, तीन के लिए कभी नहीं।
दो संख्याओं का गुणनफल 4032 और HCF 12 है। LCM निकालिए।
LCM = 4032 ÷ 12 = 336।
संभव है या नहीं, जाँचिए: HCF को LCM का भाजक होना चाहिए, और 336 ÷ 12 = 28 ✔ (एक वास्तविक जोड़ी 48 और 84 है।)
जब संख्याएँ अनुपात में दी हों। यदि दो संख्याएँ निम्नतम रूप के अनुपात m : n में हों, तो उन्हें mk और nk लिखिए। तब:
HCF = k और LCM = m × n × k
अनुपात 7 : 9 और HCF 6 → संख्याएँ 42 और 54, LCM = 7×9×6 = 378।
अनुपात 4 : 5 और LCM 120 → 20k = 120 → k = 6 = HCF।
यह तभी चलता है जब अनुपात पहले से निम्नतम रूप में हो। 8 : 10 में पदों का साझा 2 है और तब k, HCF नहीं रहता।
Co-prime संख्याओं के लिए LCM = गुणनफल (क्योंकि HCF = 1)। LCM 143 वाली दो co-prime संख्याएँ: 143 = 11 × 13, अतः वे 11 और 13 हैं।
24, 36 और 54 से भाग देने पर 5 शेष देने वाली तीन अंकों की सबसे छोटी संख्या।
यदि N तीनों से 5 शेष देती है, तो N − 5 तीनों से विभाज्य होगी, अर्थात् N − 5 उनके LCM का गुणज है।
24 = 2³×3, 36 = 2²×3², 54 = 2×3³ → LCM = 2³×3³ = 216।
परिवार: N = 216k + 5 → 5, 221, 437, …
तीन अंकों वाला पहला सदस्य = 221।
43, 91 और 183 को विभाजित कर हर बार समान शेषफल छोड़ने वाली सबसे बड़ी संख्या।
शेषफल अज्ञात है, इसलिए जोड़ियों में घटाइए — अज्ञात कट जाता है:
91 − 43 = 48, 183 − 91 = 92, 183 − 43 = 140।
उत्तर = HCF(48, 92, 140) = 4। (जाँच: हर बार शेषफल 3 आता है।)
ऊपर के पहले प्रकार में स्वयं r भी तकनीकी रूप से उत्तर है — 5 को 24 से भाग देने पर भागफल 0 और शेषफल 5। इसीलिए अच्छे प्रश्न तीन अंकों की सबसे छोटी संख्या पूछते हैं। यदि प्रश्न ऐसा न कहे और r विकल्पों में हो, तो प्रश्न त्रुटिपूर्ण है; LCM वाला उत्तर चुनिए, वही अभीष्ट है।
भाग की पहचान: भाज्य = भाजक × भागफल + शेषफल, और शेषफल सदा भाजक से छोटा होता है।
d से भाग देने पर r शेष देने वाली संख्या N = dk + r जैसी दिखती है। d जोड़ने पर भागफल बदलता है, शेषफल नहीं — इसलिए ऐसी सब संख्याएँ d-d की दूरी पर बैठती हैं: r, r+d, r+2d, …
शेषफल संख्याओं की तरह ही व्यवहार करते हैं। जोड़ने, घटाने या गुणा करने से पहले किसी भी संख्या की जगह उसका शेषफल रखा जा सकता है।
यानी: यदि a का शेषफल x और b का y हो (d से भाग पर), तो a×b का शेषफल वही होगा जो x×y का, और a+b का वही जो x+y का। (अंत में यदि परिणाम d से बड़ा हो तो फिर घटा लीजिए।)
कोई संख्या 7 से भाग देने पर 3 शेष देती है। उसका वर्ग क्या शेष देगा?
बस शेषफल का वर्ग कीजिए: 3² = 9, और 9 = 7 + 2, अतः शेषफल 2।
प्रमाण चाहिए तो: N = 7k+3, अतः N² = 49k² + 42k + 9। पहले दो पद 7 के गुणज हैं; केवल 9 बचता है, और 9, 2 शेष देता है।
ऋणात्मक शेषफल की तरकीब — इस खंड की सबसे बड़ी समय-बचत।
यदि कोई संख्या भाजक से ठीक 1 कम हो, तो उसे −1 मान लीजिए।
फिर घातें बहुत आसान: (−1)सम = +1 और (−1)विषम = −1।
121 + 122 + … + 1210 को 13 से भाग देने पर शेषफल।
12 ≡ −1 (mod 13), अतः पद −1, +1, −1, +1 … बारी-बारी चलते हैं।
जोड़ियाँ बनाइए: (−1 + 1) + (−1 + 1) + … हर जोड़ी 0 देती है।
10 पद = 5 पूरी जोड़ियाँ, कुछ बचता नहीं → शेषफल 0।
यही हल 6+6²+… ÷ 7, 8+8²+… ÷ 9, 10+10²+… ÷ 11, 14+14²+… ÷ 15 पर भी चलता है।
यदि पदों की संख्या विषम होती, तो एक −1 बिना जोड़ी रह जाता और उत्तर d − 1 होता। गिनती सम है या नहीं, यह हमेशा देखिए।
1 से 400 तक कितनी संख्याएँ 9 से 5 शेष और 7 से 4 शेष देती हैं?
पहली संख्या खोजिए: 9 से 5 शेष देने वाली संख्याएँ 5, 14, 23, 32 … और 32, 7 से भी 4 शेष देती है ✔
9 और 7 co-prime हैं, इसलिए यह पैटर्न हर LCM(9,7) = 63 पर दोहराता है।
परिवार: 32, 95, 158, 221, 284, 347 (अगला 410 होता, जो बड़ा है) → 6 संख्याएँ।
"1 से X तक कितनी संख्याएँ d से भाग पर r शेष देती हैं" में सबसे छोटा सदस्य स्वयं r होता है — क्योंकि r ÷ d में भागफल 0 और शेषफल r। उसे छोड़ देना ही गिनती में एक कम आने का सबसे आम कारण है। गिनती k = 0 से अंतिम k तक कीजिए, यानी उत्तर = (अंतिम k) + 1।
इस अध्याय का सबसे अधिक पूछा जाने वाला विचार। सीखने में दस मिनट लगते हैं और फिर कभी नहीं छूटता।
केवल आधार का अंतिम अंक मायने रखता है। ऊँची घातें लेने पर अंतिम अंक एक निश्चित समूह में दोहराते हैं, जिसे चक्र (cycle) कहते हैं।
| आधार का अंतिम अंक | घात 1, 2, 3, 4 पर अंत होता है | चक्र की लंबाई |
|---|---|---|
| 0, 1, 5, 6 | हर बार वही अंक | 1 |
| 4 | 4, 6, 4, 6 | 2 |
| 9 | 9, 1, 9, 1 | 2 |
| 2 | 2, 4, 8, 6 | 4 |
| 3 | 3, 9, 7, 1 | 4 |
| 7 | 7, 9, 3, 1 | 4 |
| 8 | 8, 4, 2, 6 | 4 |
विधि, तीन चरणों में
शेषफल 0 का अर्थ है समूह ठीक-ठीक पूरा हुआ, इसलिए आप चक्र के अंत पर पहुँचते हैं, शुरुआत पर नहीं। इस खंड में सबसे अधिक गलत उत्तर इसी एक बात से आते हैं।
घात को 4 से भाग देने का तेज़ तरीका: केवल घात के अंतिम दो अंक देखिए, क्योंकि 100, 4 का गुणज है। 7289 के लिए बस 89 ÷ 4 → शेषफल 1।
4 और 9 पर समाप्त होने वाले आधारों के लिए सम-विषम ही काफ़ी है: विषम घात → 4 या 9; सम घात → 6 या 1।
0, 1, 5 या 6 पर समाप्त आधारों में कुछ करना ही नहीं — अंक कभी बदलता नहीं।
2100 + 3100 का इकाई अंक।
2 का चक्र 2, 4, 8, 6। 100 ÷ 4 का शेषफल 0 → अंतिम प्रविष्टि → 6।
3 का चक्र 3, 9, 7, 1। फिर शेषफल 0 → अंतिम प्रविष्टि → 1।
6 + 1 = 7 → इकाई अंक 7।
शेषफल 0 को "पहली प्रविष्टि" पढ़ लेते तो 2 + 3 = 5 आता — और 5 विकल्पों में बैठा मिलेगा।
(1717)17 का इकाई अंक।
पहले कोष्ठक हटाइए: घात की घात में घातें गुणा होती हैं → 17289।
आधार का अंत 7 से → चक्र 7, 9, 3, 1। घात 289 → 89 ÷ 4 का शेषफल 1 → पहली प्रविष्टि → 7।
इसे 1734 पढ़ लेना (गुणा की जगह जोड़) 9 दे देता। घातें गुणा कीजिए।
गुणनफल और योग
n! ("n factorial") = 1 × 2 × 3 × … × n। अतः 5! = 120।
संख्या के अंत का शून्य 10 के एक गुणनखंड से आता है, और 10 = 2 × 5। अतः अंत के शून्यों की संख्या = भीतर बनी (2 × 5) जोड़ियों की संख्या।
किसी भी factorial में 2, 5 से कहीं अधिक होते हैं — हर दूसरी संख्या एक 2 देती है, पर 5 केवल हर पाँचवीं। अतः केवल 5 गिनिए।
गिनने का सूत्र (Legendre)। n! में 5 की संख्या =
⌊n/5⌋ + ⌊n/25⌋ + ⌊n/125⌋ + ⌊n/625⌋ + …
कोष्ठक ⌊ ⌋ का अर्थ है "दशमलव भाग हटा दीजिए"। जब तक भाजक n से बड़ा न हो जाए, चलते रहिए।
एक से अधिक पद क्यों? क्योंकि 25 में दो 5 होते हैं, 125 में तीन, 625 में चार — पहला पद उन्हें केवल एक बार गिनता है, इसलिए बाद के पद बाकी उठाते हैं।
165! के अंत में कितने शून्य हैं?
⌊165/5⌋ = 33
⌊165/25⌋ = 6
⌊165/125⌋ = 1
625 > 165, रुकिए।
कुल = 33 + 6 + 1 = 40 शून्य।
1000! के अंत में कितने शून्य हैं?
200 + 40 + 8 + 1 = 249। यह पड़ाव याद रखने लायक है।
चौथे पद पर ध्यान दीजिए: 1000, 625 = 54 से आगे है, इसलिए चौथा पद बनता है। तीन पर रुकने से 248 आता है — जो विकल्पों में होगा।
कितने पद चाहिए होंगे? n की तुलना 5 की घातों से कीजिए: 5, 25, 125, 625, 3125।
पहले n पर एक नज़र डाल लीजिए, फिर कभी एक पद पहले नहीं रुकेंगे।
सम संख्याओं का गुणनफल। 2×4×6×…×2n = 2n × n!, क्योंकि हर पद से एक 2 बाहर निकाला जा सकता है। तब 2 साफ़ दिख जाते हैं और n! के भीतर 5 हमेशा की तरह गिन लीजिए।
उदाहरण: पहली 25 सम संख्याओं के गुणनफल के अंत में शून्य = 225 × 25! के शून्य → 25! में 5 = 5 + 1 = 6।
6 या 12 जैसी composite संख्या की सर्वोच्च घात के लिए उसे primes में तोड़िए और कमज़ोर वाला लीजिए। 20! में 6 की सर्वोच्च घात: 3 गिनिए (6+2 = 8) और 2 गिनिए (10+5+2+1 = 18)। 6 = 2×3 है, हर 6 को एक-एक चाहिए, अतः उत्तर छोटा वाला — 8।
| वर्ग 11–30 | 121, 144, 169, 196, 225, 256, 289, 324, 361, 400, 441, 484, 529, 576, 625, 676, 729, 784, 841, 900 |
|---|---|
| घन 1–20 | 1, 8, 27, 64, 125, 216, 343, 512, 729, 1000, 1331, 1728, 2197, 2744, 3375, 4096, 4913, 5832, 6859, 8000 |
| 2 की घातें | 2, 4, 8, 16, 32, 64, 128, 256, 512, 1024, 2048, 4096 … 215 = 32768, 220 = 1048576 |
कोई पूर्ण वर्ग 2, 3, 7 या 8 पर समाप्त नहीं होता। और यदि वर्ग शून्य पर समाप्त हो, तो शून्य सम संख्या में होते हैं — अतः 8000 (तीन शून्य) पूर्ण वर्ग हो ही नहीं सकता। एक नज़र में विकल्प कट जाते हैं।
पूर्ण वर्ग बनाने के लिए कम से कम कितना जोड़ें या घटाएँ।
8000 में से कम से कम कितना घटाया जाए कि पूर्ण वर्ग बने?
√8000 ≈ 89.4। नीचे की ओर: 89² = 7921।
8000 − 7921 = 79।
(प्रश्न "जोड़ा जाए" कहता तो 90² = 8100 लेते और उत्तर 100 होता।)
5000 में कम से कम कितना जोड़ा जाए कि पूर्ण घन बने?
17³ = 4913 और 18³ = 5832। हमें ऊपर वाला घन चाहिए, अतः 5832 − 5000 = 832।
दशमलव का वर्गमूल। वर्गमूल दशमलव स्थानों को आधा कर देता है।
देखने की तरकीब: भिन्न लिखिए। 0.0625 = 625/10000, और √625 / √10000 = 25/100 = 0.25।
ध्यान दीजिए: 1 से छोटे दशमलव का मूल उससे बड़ा होता है। √0.09 = 0.3 है, 0.045 नहीं।
बड़ी संख्या के अंक गिनना।
Surd वह मूल है जो पूरा नहीं आता — √2, √5, √300।
याद रखने योग्य मान: √2 ≈ 1.414, √3 ≈ 1.732, √5 ≈ 2.236, √6 ≈ 2.449, √7 ≈ 2.646।
Conjugate। √a + √b और √a − √b conjugate हैं। इन्हें गुणा कीजिए और surd मिट जाते हैं:
(√a + √b)(√a − √b) = a − b
यह वर्गों के अंतर वाली सर्वसमिका है, और इसी से conjugate हर में से surd साफ़ कर देते हैं।
2 / (√5 − √3) को सरल कीजिए।
अंश और हर को conjugate √5 + √3 से गुणा कीजिए:
हर बनता है 5 − 3 = 2, अंश बनता है 2(√5 + √3)।
दोनों 2 कट जाते हैं → √5 + √3।
जब x एक conjugate भिन्न हो। यदि x = (√a + √b) / (√a − √b), तो 1/x वही भिन्न उल्टी हो जाती है। अतः:
x = 1/(√6 − √5) के लिए: rationalise करने पर x = √6 + √5 और 1/x = √6 − √5। अतः x − 1/x = 2√5 और x + 1/x = 2√6।
किसी surd को दो पूर्णांकों के बीच रखना। दोनों ओर के पूर्ण वर्ग खोजिए।
√300: 17² = 289 और 18² = 324, तथा 289 < 300 < 324, अतः मान 17 और 18 के बीच है।
या पहले सरल कीजिए: √300 = √(100×3) = 10√3 ≈ 17.32।
अलग-अलग घातांक वाले मूलों की तुलना — सबको घातांकों के LCM तक उठाइए।
√3, ∛5, 6√20 की तुलना: घातांक 2, 3, 6 → LCM 6। हर एक की छठी घात लीजिए: 3³ = 27, 5² = 25, 20। 27 सबसे बड़ा है, अतः √3 सबसे बड़ा।
ध्यान दीजिए, मूल के नीचे बड़ी संख्या होने पर भी वह सबसे छोटा हो सकता है — ऊँचा घातांक मान को जितना नीचे खींचता है, उतना बड़ी संख्या ऊपर नहीं उठाती।
मूल गुणा और भाग पर बँटते हैं, जोड़ या घटाव पर कभी नहीं:
√(a×b) = √a × √b ✔ √(a+b) ≠ √a + √b ✘
अतः √1.69 − √0.09 = 1.3 − 0.3 = 1.0 है, न कि √1.60।
चार योग जो कंठस्थ होने चाहिए
समान अंतर वाली सूची (AP) का योग:
योग = (पदों की संख्या / 2) × (पहला + अंतिम) और पदों की संख्या = (अंतिम − पहला)/अंतर + 1
या इसे औसत × गिनती मानिए, जहाँ समान अंतर वाली सूची का औसत (पहला + अंतिम)/2 होता है।
7 + 14 + 21 + … + 140 निकालिए।
7 बाहर निकालिए: 7(1 + 2 + … + 20) = 7 × (20×21/2) = 7 × 210 = 1470।
या AP सूत्र से: 20 पद, (20/2)(7 + 140) = 10 × 147 = 1470।
आम गलती: पदों की संख्या 140 मान लेना। गिनती तो 140 ÷ 7 = 20 है।
क्रमागत संख्याएँ — बीच पर केंद्रित कीजिए।
गिनती विषम हो तो औसत ही बीच वाली संख्या होती है। 9 के पाँच क्रमागत गुणजों का योग 225 → बीच वाला = 225/5 = 45, अतः क्रम है 27, 36, 45, 54, 63 और सबसे बड़ा 63।
संख्याओं को m−2d, m−d, m, m+d, m+2d नाम दीजिए और बीच वालों के अलावा सब कट जाता है — इसीलिए यह चलता है।
गिनती सम हो तो कोई बीच का पद नहीं होता; औसत दो केंद्रीय पदों के बीच पड़ता है। 4 के छह क्रमागत गुणजों का योग 156 → औसत 26, जो 24 और 28 के बीच है, अतः क्रम 16 से 36 तक।
Telescoping योग। जब हर पद 1/(k×(k+1)) हो, तो उसे तोड़िए:
1/(k(k+1)) = 1/k − 1/(k+1)
फिर लगभग सब कुछ कट जाता है:
1/(1×2) + 1/(2×3) + … + 1/(9×10) = (1 − ½) + (½ − ⅓) + … + (1/9 − 1/10) = 1 − 1/10 = 9/10
सामान्य परिणाम: 1/(n(n+1)) तक का योग n/(n+1) होता है।
k क्रमागत पूर्णांकों का योग = kn + k(k−1)/2। अतः:
दायरे में गुणज: 1 से N तक d के गुणजों की गिनती ⌊N/d⌋ होती है — भाग दीजिए और दशमलव हटा दीजिए।
200 तक 8 के गुणज → ⌊200/8⌋ = 25।
एक साथ दो शर्तें (समावेशन–अपवर्जन)।
a या b से विभाज्य = ⌊N/a⌋ + ⌊N/b⌋ − ⌊N/LCM⌋
अतिव्यापन एक बार घटता है क्योंकि वे संख्याएँ दो बार गिन ली गई थीं।
दोनों में से ठीक एक (प्रश्न प्रायः यों कहता है "a या b से पर उनके LCM से नहीं"):
⌊N/a⌋ + ⌊N/b⌋ − 2×⌊N/LCM⌋
अतिव्यापन दो बार घटाइए — एक बार दोहरी गिनती रोकने के लिए, और एक बार उन संख्याओं को पूरी तरह बाहर करने के लिए।
1 से 990 तक कितनी संख्याएँ 9 या 11 से विभाज्य हैं पर 99 से नहीं?
⌊990/9⌋ = 110, ⌊990/11⌋ = 90। 9 और 11 co-prime हैं, अतः LCM = 99, और ⌊990/99⌋ = 10।
ठीक एक = 110 + 90 − 20 = 180।
जाँच: केवल 9 से = 100, केवल 11 से = 80, और 100 + 80 = 180 ✔
लुभावना गलत उत्तर 190 है — वह "या" वाली गिनती है जिसमें अंतिम अपवर्जन भूल गया।
अतिव्यापन में LCM लगता है, गुणनफल नहीं। 6 और 10 का अतिव्यापन 30 है, 60 नहीं — उनमें एक 2 साझा है। LCM गुणनफल के बराबर केवल co-prime जोड़ियों में होता है।
किसी निश्चित स्थान पर निश्चित अंक। हर स्थान के विकल्प गिनकर गुणा कीजिए। पहला अंक 0 नहीं हो सकता — और यह नियम ठीक एक बार लगता है।
3 अंकों की कितनी संख्याओं के अंकों का योग 7 है?
इसे a + b + c = 7 लिखिए, जहाँ a ≥ 1। a′ = a − 1 रखिए ताकि तीनों 0 या अधिक हो सकें: a′ + b + c = 6।
6 एक जैसी इकाइयाँ 3 स्थानों में बाँटने के तरीके = C(6+2, 2) = C(8,2) = 28।
धीमी पर सुरक्षित जाँच: a = 1 पर 7 तरीके, a = 2 पर 6, फिर 5, 4, 3, 2, 1 → 7+6+5+4+3+2+1 = 28 ✔
पूरक गिनती — जब सीधी गिनती कई उलझी स्थितियों में बँट जाए, तो उलटा गिनिए।
"3 अंकों की कितनी संख्याओं में अंकों का गुणनफल शून्य है" का अर्थ है कम से कम एक अंक 0 हो। इसके बजाय बिना शून्य वाली गिनिए: 9×9×9 = 729। कुल 3 अंकों की संख्याएँ = 900। उत्तर = 900 − 729 = 171।
Binary में केवल 0 और 1 चलते हैं। दाईं ओर से स्थानीय मान होते हैं 1, 2, 4, 8, 16, 32, 64, 128, … — हर अगला पिछले का दोगुना (जबकि हमारी सामान्य दशमलव पद्धति में 1, 10, 100 होते हैं)।
Binary से दशमलव: 1101101
अंकों के ऊपर स्थानीय मान लिखिए और चालू वालों को जोड़ दीजिए:
64 + 32 + 8 + 4 + 1 = 109
दशमलव से binary: 96
बार-बार 2 से भाग दीजिए और शेषफल नीचे से ऊपर पढ़िए:
96→48 शेष 0, 48→24 शेष 0, 24→12 शेष 0, 12→6 शेष 0, 6→3 शेष 0, 3→1 शेष 1, 1→0 शेष 1 → 1100000
या घटाकर: 96 = 64 + 32, अतः वही दो स्थान चालू कीजिए।
वे तथ्य जो पूरा प्रश्न तुरंत हल कर देते हैं
जोड़-घटाव के लिए दशमलव में बदलिए, गणना कीजिए, वापस बदल लीजिए। यह binary में हासिल लेने-देने से कहीं तेज़ और सुरक्षित है, जहाँ हर हासिल 2 का होता है, 10 का नहीं।
10000 − 111 → 16 − 7 = 9 → 1001
फिर सम-विषम से जाँचिए: 16 सम में से 7 विषम घटाने पर उत्तर विषम होना चाहिए, और 1001 का अंत 1 से है ✔
| सर्वसमिका | किस काम की |
|---|---|
| a² − b² = (a+b)(a−b) | वर्गों का अंतर; conjugate surd; क्रमागत गुणजों के वर्गों का अंतर |
| (a+b)² = a² + 2ab + b² | योग, गुणनफल और वर्गों के योग को जोड़ती है |
| (a−b)² = a² − 2ab + b² | वही, अंतर के लिए |
| (a+b)² − (a−b)² = 4ab | योग और अंतर से गुणनफल निकालती है |
| (a+b)² = (a−b)² + 4ab | a−b और ab पता हों तो a+b देती है |
| a² + b² = ((a+b)² + (a−b)²) / 2 | योग और अंतर से वर्गों का योग |
यदि a − b = 4 और ab = 45 (दोनों धनात्मक), तो a + b निकालिए।
(a+b)² = (a−b)² + 4ab = 16 + 180 = 196 → a + b = 14।
(तब a = 9, b = 5। जाँच: 9−5 = 4 ✔, 9×5 = 45 ✔)
x + 1/x की सीढ़ी। वर्ग करने पर हर बार +2 आ जाता है, क्योंकि x × 1/x = 1।
चिह्न पर ध्यान: जोड़ दिया हो तो 2 घटाइए; घटाव दिया हो तो 2 जोड़िए।
यदि a + 1/a = 4, तो a⁴ + 1/a⁴ निकालिए।
दो बार सीढ़ी चढ़िए:
a² + 1/a² = 4² − 2 = 14
a⁴ + 1/a⁴ = 14² − 2 = 194
196 आने का अर्थ है अंतिम −2 भूल गए; 254 आने का अर्थ है 14 की जगह 16 का वर्ग कर दिया।
दो अंकों की संख्या और उसकी उलटी संख्या। संख्या को 10a + b लिखिए। तब:
"उलटने पर संख्या 36 घट जाती है" → 9(a−b) = 36 → a − b = 4। a + b = 10 के साथ a = 7, b = 3, अतः संख्या 73।
दिशा देखिए: 37 का भी अंक-योग वही है और बदलाव का आकार भी वही, पर वहाँ उलटी संख्या बड़ी है। यही अभीष्ट जाल है।
ये संख्या पद्धति के शाब्दिक प्रश्न हैं, प्रतिशत या लाभ-हानि के नहीं। हर एक का ढाँचा तय है — ढाँचा सीख लीजिए, फिर संख्याएँ आसान हो जाती हैं।
1. दो तरह के सिक्के या नोट। गिनती का समीकरण + मूल्य का समीकरण।
एक और दो रुपये के कुल 45 सिक्के, कुल मूल्य Rs 68। दो रुपये के कितने?
a + b = 45 और a + 2b = 68। घटाइए → b = 23।
तेज़ रास्ता: यदि पैंतालीसों एक रुपये के होते तो मूल्य 45 होता; अतिरिक्त 68 − 45 = 23 दो रुपये वाले सिक्कों से आता है, हर एक 1 अतिरिक्त देता है।
2. दंड सहित अंक। "सभी प्रश्न हल किए" का अर्थ है सही + गलत = कुल, कोई तीसरा समूह नहीं।
हर सही पर 4 अंक, हर गलत पर 1 कटता है, सभी 50 हल किए, अंक 120।
4c − (50 − c) = 120 → 5c = 170 → c = 34।
तेज़ रास्ता: सभी सही होते तो 200। हर गलती 4 + 1 = 5 की हानि करती है (4 न मिलना और 1 कटना)। कमी 80 → 80/5 = 16 गलत → 34 सही।
गलत = (अधिकतम − प्राप्त अंक) / (प्रति सही अंक + दंड)
3. आयु। सुनहरा नियम: t वर्ष बाद हर व्यक्ति की आयु t से बढ़ती है। किसी एक की आयु अकेले मत बढ़ाइए।
पिता अभी पुत्र से 7 गुना; 6 वर्ष बाद 4 गुना होंगे।
7s + 6 = 4(s + 6) → 3s = 18 → पुत्र 6 वर्ष का, पिता 42 के।
हर बार चलने वाली जाँच: आयु का अंतर कभी नहीं बदलता। 42 − 6 = 36 अभी, 48 − 12 = 36 बाद में ✔
सूत्र: पिता अभी m गुना और t वर्ष बाद n गुना हों, तो पुत्र की आयु = t(n−1)/(m−n)।
4. सिर और टाँगें। मुर्गी 2 टाँगें, गाय 4; साइकिल 2 पहिए, रिक्शा 3।
36 सिर, 100 टाँगें, मुर्गियाँ और गायें। → h + c = 36, 2h + 4c = 100 → h = 22।
तेज़ रास्ता: सब मुर्गियाँ होतीं तो टाँगें 72 होतीं। अतिरिक्त 28, और हर गाय 2 अतिरिक्त देती है → 14 गायें, 22 मुर्गियाँ।
5. योग और संबंध। दो संख्याएँ, एक योग और एक तुलना।
योग 108; बड़ी संख्या छोटी के 3 गुने से 8 अधिक है।
बड़ी को दो तरह से लिखिए: 108 − s और 3s + 8। बराबर रखिए → 4s = 100 → s = 25, बड़ी = 83।
ध्यान से पढ़िए: "छोटी के 3 गुने से 8 अधिक" 3s + 8 है, 3(s + 8) नहीं।
6. एक ही संख्या के भिन्नात्मक भाग। "हर 8 में से 5 भाग" का अर्थ बस पाँच-अष्टमांश है।
किसी संख्या का 5/8, उसी के 3/5 से 6 अधिक है।
पहले भिन्नें घटाइए: 5/8 − 3/5 = 25/40 − 24/40 = 1/40।
अतः (1/40)x = 6 → x = 240।
संख्या = दिया गया अंतर ÷ भिन्नों का अंतर
7. अनुपात। m : n को mx और nx बना लीजिए — अनुपात नाप तय करता है, x आकार।
अंक-योग की शर्त वाली दो अंकों की संख्याएँ। 10a + b लिखिए और सरल कीजिए।
जब पहली शर्त से एक परिवार बचे, तो दूसरी शर्त (अंकों में 1 का अंतर, अंकों का योग 10, आदि) अकेला उत्तर चुन लेती है।
इस अध्याय में अधिकांश नंबर गणना की गलती से नहीं कटते। वे पढ़ने की गलती से कटते हैं। ये छह बार-बार आते हैं।
प्रश्न कौन सी संख्या माँग रहा है? "बड़ी", "बीच वाली", "कुल", "कितनी अधिक"। आप छोटी निकालते हैं और आदतन उसी पर निशान लगा देते हैं। शुरू करने से पहले अंतिम वाक्यांश रेखांकित कीजिए।
जातीय मान या स्थानीय मान? अंकों का योग, स्थानीय मानों का योग, स्थानीय मानों का अंतर — एक ही संख्या से तीन अलग उत्तर, और तीनों विकल्पों में होंगे।
Cyclicity में शेषफल 0। चक्र की लंबाई से विभाज्य घात अंतिम प्रविष्टि पर पहुँचती है, पहली पर नहीं। 2100 का अंत 6 से है, 2 से नहीं।
"सदैव विभाज्य" में दो सही विकल्प। यदि 6 और 12 दोनों सदा चलते हों, तो प्रश्न का अर्थ सबसे बड़ी है। n की सबसे छोटी कीमत पहले जाँचिए — प्रायः वही उत्तर पक्का कर देती है।
ऋणात्मक संभावनाएँ। "दो संख्याओं में 3 का अंतर और वर्गों का योग 117" को 9 और 6 पूरा करते हैं — और −9 तथा −6 भी। यदि विकल्पों में केवल धनात्मक हों, तो प्रश्न का अर्थ धनात्मक ही है। चिंता करने से पहले विकल्प देख लीजिए।
दो विकल्प जो एक ही मान हैं। कोई अनुपात एक विकल्प में निम्नतम रूप में और दूसरे में बिना छोटा किए दिख सकता है — 8 : 15 और 56 : 105 एक ही चीज़ हैं। विकल्पों से मिलाने से पहले अपना उत्तर सदा छोटा कीजिए और निम्नतम रूप वाला विकल्प चुनिए।
किसी भी उत्तर पर तीन मुफ़्त जाँचें
परीक्षा से एक रात पहले केवल यही पन्ना पढ़िए।
| विषय | सूत्र |
|---|---|
| गुणनखंडों की संख्या | N = paqbrc से (a+1)(b+1)(c+1)… |
| गुणनखंडों का योग | (1+p+…+pa)(1+q+…+qb)… |
| गुणनखंडों का गुणनफल | N(गुणनखंडों की संख्या)/2 |
| वर्ग गुणनखंड | (⌊a/2⌋+1)(⌊b/2⌋+1)… | घन गुणनखंड: हर एक ⌊a/3⌋+1 |
| HCF × LCM | = दोनों संख्याओं का गुणनफल (केवल दो संख्याओं के लिए) |
| अनुपात m : n, HCF k | संख्याएँ mk, nk | LCM = mnk |
| a, b, c से समान शेष r | N = LCM(a,b,c) × k + r |
| समान अज्ञात शेषफल | अंतरों का HCF |
| n! के अंत के शून्य | ⌊n/5⌋ + ⌊n/25⌋ + ⌊n/125⌋ + ⌊n/625⌋ |
| 1 + 2 + … + n | n(n+1)/2 | विषम: n² | सम: n(n+1) |
| वर्गों का योग | n(n+1)(2n+1)/6 |
| AP का योग | (गिनती/2) × (पहला + अंतिम); गिनती = (अंतिम − पहला)/अंतर + 1 |
| Telescoping | Σ 1/(k(k+1)) n तक = n/(n+1) |
| a, b में से ठीक एक | ⌊N/a⌋ + ⌊N/b⌋ − 2⌊N/LCM⌋ |
| दो अंकों की संख्या और उलटी | अंतर = 9(a−b); योग = 11(a+b) |
| x² + 1/x² | (x + 1/x)² − 2 | (x − 1/x)² + 2 |
| a − b और ab से a + b | (a+b)² = (a−b)² + 4ab |
| Conjugate surd | (√a + √b)(√a − √b) = a − b |
| दंड सहित अंक | गलत = (अधिकतम − अंक) / (प्रति सही अंक + दंड) |
यदि ये आठ बिना नोट्स के हल हो जाएँ, तो आप टेस्ट के लिए तैयार हैं। उत्तर नीचे हैं।
उत्तर: 1) 18 2) 3 3) 33 4) 428 5) 275 6) 4 7) 56 8) 11
संख्या पद्धति वह अध्याय है जो संख्याओं और उनके गुणों से जुड़ा है — संख्याओं के प्रकार, विभाज्यता, गुणनखंड, HCF और LCM, शेषफल, इकाई अंक और इनसे जुड़े विचार। यह कई अन्य quant अध्यायों का आधार है, इसलिए इसे सबसे पहले पढ़ा जाता है।
हाँ। SSC CGL Tier-1 के हर पेपर में इससे प्रश्न आते हैं, और इसकी अवधारणाएँ सरलीकरण, LCM-HCF के शाब्दिक प्रश्नों और आँकड़ों वाले प्रश्नों में भी काम आती हैं। यह अधिक अंक दिलाने वाला अध्याय है क्योंकि अधिकांश प्रश्नों में एक नियम लगता है और गणना बहुत कम होती है।
संख्याओं के प्रकार और prime गुणनखंडन से शुरू कीजिए। अकेला prime गुणनखंडन गुणनखंड, भाजकों की गिनती, HCF, LCM और पूर्ण वर्ग वाले प्रश्न खोल देता है — यानी लगभग एक-तिहाई अध्याय।
Cyclicity सारणी लगाइए। आधार का अंतिम अंक लीजिए, घात को चक्र की लंबाई (प्रायः 4) से भाग दीजिए, और उस शेषफल पर चक्र पढ़िए। शेषफल 0 का अर्थ है चक्र की अंतिम प्रविष्टि, पहली नहीं।
संख्या को pa × qb × rc लिखिए और (a+1)(b+1)(c+1) गुणा कीजिए। 360 = 2³ × 3² × 5 के लिए गिनती 4 × 3 × 2 = 24 है।
यहाँ एक खंड पूरा करने के बाद TrickySSC पर उसी विषय का संख्या पद्धति प्रैक्टिस टेस्ट दीजिए। टेस्ट तीन स्तरों में बँटे हैं, और हर प्रश्न के साथ चरण-दर-चरण हल दिया गया है।
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